Tuesday 13 May 2008

शराबी बातें

शराब शरीर को खतम करती है,
शराब समाज को खतम करती है
आओ इस शराब को खतम करते हैं
एक बोतल तुम खतम करो एक हम खतम करते हैं।

 

दवा और दारु में क्या अन्तर है?
उत्तर : दवा गर्लफ्रेंड की तरह है जो एक्सपाइरी डेट के साथ आती है। दारु पत्नी की तरह है, जो जितनी पुरानी होती है, उतना सर चढ़के बोलती है।

 

एक हरयाणवी ताउ को शराब पीने की आदत लग गई थी। वह जब देखो तब शराब के नशे में धुत रहता था। एक बार सुबह से  देशी शराब पी रहा था। उस का छोरा रोज की तरह अखबार लेकर आया और ताउ को पकड़ा दिया. ताउ पढ़ा लिखा था और बिना अखबार पढ़े घर से बाहर नहीं जाता था। ताउ ने पढना शुरु किया, पर अखबार के पहले पन्ने पर लिखा था ' शराब पीने से मौत! शराब सेहत के लिये खतरनाक; कैंसर और हार्ट-अटैक शराब के साथी' ... ताउ ने थोड़ी देर कुछ सोचा फिर बड़े ही ताव में बोला," सारी ईसी-तीसी हो गई, सत्यानास कर लिया!...बस, इतना ही ठीक था, आज से बंद!!!
ताई जो अंदर बैठी सुन रही थी, खुश होकर बाहर आकर बोली," के बात, आज से के बंद करेगा? दारु पीनी?"
ताउ ने उसकी तरफ देखा और बोला," मत ना पूछ, आज से बिलकुल बंद...आज से अखबार लेना बंद!!!"

 

 

पत्नी: क्या कर रहे हो?
पति: मख्खियां मार रहा हूं।
पत्नी : कितनी मारीं?

पति : 3 नर और 2 मादा।
पत्नी: कैसे मालूम?
पति: क्योंकि 3 दारु की बोतल से चिपकी थीं और 2 फोन से...


 


एक दिन भगवान का शराब पीने का मन हुआ तो वो धरती पर एक ठेके पर पहंचे। पचास पैग पीने के बाद जब और मांगी तो ठेके वाला आया और बोला “ आप को अभी तक चढ़ी नहीं क्या? ” भगवान ने कहा - मैं भगवान हूं। ये सुनकर ठेके वाला बोला - हां अब चढ़ी इसको।

Friday 18 April 2008

अजीत चुटकुले - 2

दृश्य: अजीत अपने एक दुश्मन को देख लेता है।

अजीत : माइकल, वो जो आदमी घड़ी पहने हुये तुम्हें नजर आ रहा है, वो हमारा मेहमान है। तुम जाकर उसके हाथ में भी घड़ी पहना दो.. फिर वो दो घड़ी का मेहमान हो जायेगा !


दृश्य : अजीत हैलीकॉप्टर में अपने आदमियों के साथ भाग रहा है...

अजीत : कुछ ही देर में हमारा हैलीकॉप्टर हिंदुस्तान की सरहदों के पार दूर बर्मिंघम में होगा। वहां तुम्हें एक काले रंग की शेवरले (कार) नजर आयेगी। वो तुम्हें सिगनल देगी ...ऑन..ऑफ..ऑन..ऑफ।

राबर्ट : बॉस..हमारा सिगनल क्या होगा?

अजीत : बेवकूफ...ऑफ..ऑन..ऑफ..ऑन...


राबर्ट : बॉस? और इस पिल्ले का क्या  करें बॉस?

अजीत : पीटर! इस साले को सुपर-कंडक्टर में डाल दो, साला बस में टिकट देते देते थक जायेगा।


पीटर: बॉस, इस साले का क्या करें?

अजीत : इसे माइक्रोप्रोसेसर में डाल दो...BIT by BIT मरेगा !


दृश्य : अजीत अपने चेलों को दुश्मन को मारने का हुक्म दे रहा है।

अजीत : राबर्ट , इसे वार्निश में डाल दो, साला मर भी जायेगा और फिनिश भी आ जायेगी।


बॉब : बॉस, मिशन पर कैसे जाउं, मुझे हैडेक (सिर दर्द) हो रहा है.

अजीत : अबे हैड एक हो या दो, काम तो करना ही पड़ेगा!


दृश्य : राबर्ट और अजीत एक नाव पर सवार हैं। बॉस अचानक नाव में एक छेद कर देता है और नाव में पानी भरने लगता है। राबर्ट को कुछ समझ में नहीं आता है।

राबर्ट : बॉस अब क्या होगा ??

अजीत: राबर्ट एक और छेद बना दो, और एक छेद में इन और दूसरे में आऊट लिख दो। एक छेद से पानी अन्दर आयेगा और दूसरे से बाहर निकल जायेगा!!


दृश्य : राबर्ट के घर मे जुड़वां बच्चे हुये हैं और वो ये खबर अजीत को देता है।

राबर्ट : बॉस, मेरे दोनों बच्चों के लिये कोई नाम बताइये..

अजीत : एक का नाम रख दो पीटर....

राबर्ट : बास और दूसरे का?

अजीत : रिपीटर


दृश्य: माइकल के घर तीन बच्चे जन्म लेते हैं और वो ये खबर अजीत को देता है।

माइकल : बॉस, मेरे तीन बच्चों के क्या नाम सोचे हैं आपने?

अजीत : नाम रखो, पीटर, रिपीटर और वांग चुंग।

माइकल : तीसरे का नाम वांग चुंग क्यों बॉस???!!!

अजीत : बेवकूफ, तुम्हें मालूम नहीं...इस पृथ्वी में पैदा होने वाला हर तीसरा बच्चा चीनी होता है।


दृश्य: अजीत अपने पसंदीदा हीरो के हाथ पकड़ कर अपने चेलों को निर्देश देता है।

अजीत : माइकल, इस साले के एक हाथ में लाल और दूसरे हाथ में हरा रंग लगा दो।

माइकल : लेकिन क्यों बॉस?

अजीत : बेवकूफ, इतना भी नहीं जानता? जब जनता यहां आयेगी तो इसे रंगे हाथों पकड़ लेगी। हे.. हे..


दृश्य : राबर्ट और अजीत  शिकार पर जाते हैं।

राबर्ट एक मोर देखता है...

राबर्ट : बास....मोर.. मोर...

अजीत मोर का शिकार करके कहता है, नो मोर!


राबर्ट : बास इस गद्दार का क्या करें?

अजीत :इसे सुई चुभा-चुभा कर मार दो... पुलिस समझेगी कि सुईसाइड (आत्महत्या) हई है। 


पीटर : बास ये आदमी तो कुछ बोल नहीं रहा...

अजीत : इसे रिवाल्विंग कुरसी पर बैठा दो, पता तो लगे चक्कर क्या है।

Wednesday 16 April 2008

सास-बहू

  • नौकरानी ने अपनी मालकिन से कहा, मेमसाब गजब हो गया। पड़ोस की तीन औरतें आपका सास को पीट रही हैं। मालकिन नौकरानी के साथ बालकनी में आई और चुपचाप तमाशा देखने लगी। नौकरानी ने पूछा, आप मदद करने नहीं जायेंगी। मालकिन ने कहा - नहीं, तीन ही काफी हैं।
  • सासों की बैठक में एक सास कह रही थी - "पहले मुझे सास अच्छी नहीं मिली और अब बहू॑"
  • बहू का पहला और दूसरा अफेयर सुनने के बाद ससुर ने बहू को मारा । तीसरा और चौथा सुनने के बाद पति ने मारा । लेकिन सास चुप रही। क्यों?  क्योंकि सास भी कभी बहू थी।
  • बहू : मां जी, ये अभी नहीं आये,... कहीं किसी दूसरी लड़की के साथ ... सास  - अरे कलमुंही, तू हमेशा उल्टा क्यों सोचती है? ऐसा भी तो हो सकता है कि किसी ट्रक के नीचे आ गया हो।
  • मुहल्ले की सारी सासों ने पिकनिक का प्रोग्राम बनाया। एक बस में भरकर सारी सासें घूमने गईं। मुहल्ले में बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आने से कोहराम सच गया। सब रो रहे थे। सब दुखी थे। एक बहू बहुत जोर-जोर से रो रही थी। सबने दिलासा दिया तो वो और रोने लगी। काफी देर बाद उसने बताया कि उसकी सास लेट होने के कारण पिकनिक पर नहीं जा पाई थी।
  •  

Sunday 30 March 2008

नेताजी की याद

एक महाविद्यालय में

नये विभाग के लिये

नया भवन बनवाया गया,

उसके उदघाटन के लिये

विद्यालय के एक पुराने छात्र

लेकिन नये नेता को

बुलवाया गया ।

 

अध्यापकों ने

कार के दरवाजे खोले

नेता जी उतरते ही बोले -

यहां तर गईं

कितनी ही पीढ़ियां,

अहा!

वही पुरानी सीढ़ियां।

वही पुराना मैदान

वही पुराने वृक्ष,

वही कार्यालय

वही पुराने कक्ष।

वही पुरानी  खिड़की

वही जाली,

अहा देखिये

वही पुराना माली।

 

मंडरा रहे थे

यादों के धुंधलके

थोड़ा और आगे गये चल के -

वही पुरानी

चिमगादड़ों की साउण्ड,

वही घंटा

वही पुराना प्लेग्राउण्ड ।

छात्रों में

वही पुरानी बदहवासी,

अहा वही पुराना चपरासी ।

नमस्कार, नमस्कार!

 

अब आया हॉस्टल का द्वार -

हॉस्टल में वही कमरे

वही पुराना खानसामा,

वही धमाचौकड़ी

वही पुराना हंगामा।

 

नेताजी पर

पुरानी स्मृतियां छा रहीं थीं,

तभी पाया

कि एक कमरे से

कुछ ज्यादा ही

आवाजें रही थीं।

उन्होंने दरवाजा खटखटाया,

लड़के ने खोला

पर घबराया ।

क्योंकि अन्दर एक कन्या थी

वल्कल-वसन-वन्या थी।

दिल रह गया दहल के

लेकिन बोला संभल के --

आइये सर

मेरा नाम मदन है,

इनसे मिलिये

मेरी कजन है।

 

नेता जी लगे मुस्कराने --

वही पुराने बहाने।

Tuesday 18 March 2008

नशीली चाल

श्रीमान जी ने ज्यादा पी ली,
चाल हो गई नशीली।

देह को जैसे-तैसे उठाया
तो सबसे पहले काया
एक खम्बे से टकराई,
बोले --
माफ करना भाई!

फिर आया सार्वजनिक संडास,
टकराकर बोला --
माफ करना बॉस !

कदम फिर लड़खड़ाये,
तो लैटरबॉक्स से
जा टकराये।

आखिरी कोशिश में
पेड़ से भिड़े,
और वहीं गिर पड़े।
बोले-
अब रिस्क नहीं लूंगा,
ये भीड़ गुजर जाये तभी उठूंगा।